Skip to main content

मेरी मनपसंद लेखिका मन्नू भंडारी


कल्पनाओं के बाजार में हर कोई जाता है लेकिन उस कल्पना में एक अच्छे नेता की कल्पना करना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं।
मेरी भी एक छोटी सी कोशिश थी लेकिन नाकाम रहीं क्योंकि मैंने उस किरदार को कागज़ पर नहीं लिखा।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
तुम्हारी लिखी गज़ल जिसे मैं बार बार सुनती हूं, तब तक सुनती हूं जब तक नींद ना आ जाये। मेरी पसंदीदा गज़ल है। जगजीत सिंह की ग़ज़लों से भी ज्यादा सुनती हूं। अगर कोई सुनने की ख्वाहिश करता है और कहता है कि मुझे भी सुनाओ...लेकिन उन्हें कुछ सुनाई ही नहीं देता क्योंकि उसमें केवल तुम्हारा अहसास है जो केवल महसूस किया जा सकता है। इसी गज़ल को मैं बार बार सुनकर इतराती हूं, इसलिए घमंडी हूं। मैंने जिस किरदार की रचना की थी तुम उस किरदार से बिल्कुल अलग हो। तुम्हें कल्पनाओं के बाज़ार में खोजने की कोशिश की तभी मन्नू भंडारी की कहानी "मैं हार गई" याद आ गयी । उन्होंने अपनी कलम से दो काल्पनिक किरदारों को जन्म दिया था। वह कोशिश करती हैं कि एक आदर्शवादी नेता इस कलम के जरिए पैदा हो। पहले प्रयोग में वह एक निर्धन वर्ग में अपने आदर्श नायक को संकल्पित करती हैं। नेताजी जी जन्म एक निर्धन कृषक परिवार में होता है। वो एक ऐसे नेता का निर्माण करना चाहती थी जो प्रजा हितेषी, शोषण विरोधी, गरीबों के लिए काम करे, उसके पिता की मृत्यु होने के बाद, अंधी मां और बीमार बहन के लिए मजदूरी करने निकल पड़ता है। घर खर्च पूरा न हो पाने की वजह से वे चोरी करने लगता है। इस प्रकार तो यह एक अच्छा और आदर्श नेता कभी नहीं बन सकता।
मन्नू भंडारी सोचती हैं कि यदि आवश्यकताओं का अभाव ही न होता है, वह अमीर होता तो उसे चोरी नहीं करनी पड़ती। जिसके पास सभी सुख सुविधाएं मौजूद होती है। उसे अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास नहीं करना पड़ता। दुसरा नेता अमीर परिवार में जन्म लेता है लेकिन लेखिका तब भी असफल होती है। वो अपनी कल्पनाओं में भी हार जाती हैं, लेकिन लिखने में सफल हो जाती हैं।
उसके बाद लिखने में ही नहीं अपने पूरे जीवन में सफल होती हैं और वो लेखिका मन्नू भंडारी हैं।
{13 जुलाई 2018}
#latePost
#komal

https://www.facebook.com/ThodiBakwaas/


Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

तुम्हारे नंबर और शिकायते

contact list  ____________ ____________ मोबाइल में नये नंबरों की लिस्ट लम्बी होती जा रही है। कुछ contact unsaved ही पड़े हैे। कुछ करीबी दोस्त पीछे छुटते जा रहे है। रोज़ किसी दोस्त का कॉल आता है और किसी ना किसी काम में व्यस्त होने पर कहना पड़ता हैं आज शाम को याद से कॉल जरूर करूंगी। इसे वक़्त की कमी ही कहा जा सकता है। कुछ दोस्तों से समय समय पर मुलाकात होती रहती है लेकिन फिर भी कुछ दोस्त छूट जाते है। और जिन दोस्तो से मिलना नहीं होता उनकी शिकायतों की लिस्ट बढ़ती चली जाती है। कभी कॉलेज के दोस्त तो कभी स्कूल के दोस्त और हम आगे बढ़ते जाते हैं, सिर्फ उन किस्सों के साथ जिन्हें हम अब याद करके धीमे से मुस्कुरा देते है। कोमल कश्यप

दिल्ली में समर की वापसी पार्ट - 2

समर - कहा हो? तुम तो हमेशा टाइम से पंहुचती हो। आज इतना लेट... शिप्रा - अरे बस लेट हो गयी। समर - लेकिन बता तो देती तुम्हें कॉल कर रहा हूं। तुम कॉल रिसीव क्यूं नहीं कर रहीं? शिप्रा - मोबाइल साइलेंट पर था। समर - तुम इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हो। शिप्रा - मगरमच्छ वाली हरकतें गयी नहीं तुम्हारी ... बस पहुँच रही हूँ। (शिप्रा समर से मिलने पहुँच जाती है) समर - आगयी मैडम... शिप्रा - मगरमच्छ 😑 पहले ये बताओ भूले भटके सदर इतने भीड़ भाड़ वाले शहर में कैसे आना हुआ। तुम इतने साल कहा थे? दीवाली की शॉपिंग करने आये हो? समर - तुमने जब मुझे ना कहा था फिर मेरे पास इस सिटी को छोड़कर जाने के अलावा कोई ऑपशन नहीं था। क्या रक्खा है इस शहर में तुम्हारे अलावा 😌 शॉपिंग तो करूंगा तुम्हारे साथ। शिप्रा - फोर इयर्स यार तुम अभी तक वहीं हो... इन चार सालों में बहुत कुछ बदला है। समर - मुंबई में दिल्ली को बसाकर रक्खा है। यानी तुम्हें... तुमने उस दिन जो किया भुला दिया। तुम्हारे बाद मेरा जिगरी दोस्त तुम्हारा भाई जॉय ने भी बात करना छोड़ दिया था। मैं अकेला हो गया था। इस ब्यूटीफुल सिटी में मेरा हार्ट अभी भी धड़कता है। 😘 शिप्रा...

समर पार्ट - 1

जनवरी,2016 एक सुबह समर - क्यों नाराज़ होती हो ? शिप्रा - नाराज़ कहा हूं बस ऐसे ही | तुम पर तो इंग्लिश का भूत सवार हो गया है, क्यों सुनते हो किसी की बात (गुस्साएं हुए)................अरे हां मैंने तुम्हारी वो कविता पढ़ी थी जो तुमने मुझे कल भेजी थी| क्या गज़ब लिखते हो| तुम ऐसा करो एक्टिंग छोड़ो और कवि बन जाओ। समर - कविता बस शौक के लिए लिखता हूं बाकि तुम जानती ही हों सब | तुम जानती हो हिंदी से मुझेे बहुत प्रेम है इसलिए अंग्रेज़ी बोलने से परहेज़ करता हूं और लोग समझ लेते है कि मुझे अंग्रेज़ी आती ही नहीं| एक्टिंग मेरी जिन्दगी है। शिप्रा - अरे भोले भाले लड़के अपने मन की सुनते है और लोग क्या कहते है उसकी चिंता मत किया करो तुम सिर्फ अपनी एक्टिंग पर ध्यान दो | समर - रिमा लोग सहीं कहते है मुझे अपने स्वभाव में थोड़ा बदलाव कर ही लेना चाहिए तुम बताओ अंग्रेजी में ही बात करनी शुरू कर दूं?? शिप्रा - तुम्हें अपनी मर्ज़ी से खुलकर जीना चाहिए...... एक्टिंग स्कूल ऑफ ड्रामा से निकलने के बाद क्या करने वाले हो?? समर - मैथिली तुम्हें रास नहीं आती और मुझे मैथिली में ही करनी है| सोच ...