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दिल्ली में समर की वापसी पार्ट - 2


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समर - कहा हो? तुम तो हमेशा टाइम से पंहुचती हो। आज इतना लेट...
शिप्रा - अरे बस लेट हो गयी।
समर - लेकिन बता तो देती तुम्हें कॉल कर रहा हूं। तुम कॉल रिसीव क्यूं नहीं कर रहीं?
शिप्रा - मोबाइल साइलेंट पर था।
समर - तुम इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हो।
शिप्रा - मगरमच्छ वाली हरकतें गयी नहीं तुम्हारी ... बस पहुँच रही हूँ।
(शिप्रा समर से मिलने पहुँच जाती है)
समर - आगयी मैडम...
शिप्रा - मगरमच्छ 😑 पहले ये बताओ भूले भटके सदर इतने भीड़ भाड़ वाले शहर में कैसे आना हुआ। तुम इतने साल कहा थे? दीवाली की शॉपिंग करने आये हो?
समर - तुमने जब मुझे ना कहा था फिर मेरे पास इस सिटी को छोड़कर जाने के अलावा कोई ऑपशन नहीं था। क्या रक्खा है इस शहर में तुम्हारे अलावा 😌 शॉपिंग तो करूंगा तुम्हारे साथ।
शिप्रा - फोर इयर्स यार तुम अभी तक वहीं हो... इन चार सालों में बहुत कुछ बदला है।
समर - मुंबई में दिल्ली को बसाकर रक्खा है। यानी तुम्हें... तुमने उस दिन जो किया भुला दिया। तुम्हारे बाद मेरा जिगरी दोस्त तुम्हारा भाई जॉय ने भी बात करना छोड़ दिया था। मैं अकेला हो गया था। इस ब्यूटीफुल सिटी में मेरा हार्ट अभी भी धड़कता है। 😘
शिप्रा - अपना दिल यहां क्यूं छोड़कर गए। मैं तो आगे बढ़ चुकी हूं समर।
समर - तुम्हारी पढ़ाई... प्रिंसीपल ने डैडी को कंप्लेन कर दी थी कि हम दोनों स्कूल में आशिक़ी करने जाते है, सो प्लस टू के बाद डैडी ने मुंबई जाने का डिसीजन लिया।
शिप्रा - तो अब दिल्ली आने का मकसद।
समर - बताता हूं सब कुछ। तुम्हारी चिड़चिड़ाने की आदत बरकरार है। इतने साल बाद मिले इस तरह कौन बात करता है भला।
शिप्रा - ( शिप्रा ने समर के गुस्से को कम करने के लिए एक पुराना किस्सा छेड़ दिया )
तुमने सिर्फ प्रोपोज किया था याद है फ्रैंडशिप बैंड के साथ। मुझे बैंड पहनाने के लिए तुम मेरी पूरी फैमिली के लिए बैंड लाये थे 😍😍 और तो और मेरी ही विंडो से मुझे फ्लॉवर तोड़कर दिया।
समर - तुम्हारे लिए इतना रिस्क लिया और तुमने घर में सबको बता दिया कि समर ने मुझे फूल दिया 😕 वो सिर्फ एक पिंक रोज़ नहीं था मेरी जान, वो मेरा दिल था जिसे तुमने तोड़ दिया था।
शिप्रा - तुम्हें पता है न कि पापा सब जानते थे तुम्हारे और मेरे बारे में। मुझे कुछ बड़ा करना था अपनी लाइफ में। पापा मुझे कॉलेज में एडमिशन नहीं लेने दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर कॉलेज में दाखिल लेना है तो पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही लगाना होगा।
समर - मेरी नजर हमेशा तुम्हारी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर रहती है।
शिप्रा - तुम जानते ही होंगे मेरी जिंदगी मेंए ए... (कुछ कहते कहते शिप्रा रुक गयी)
समर - मैंने देखा तुम्हारी प्रोफ़ाइल पर तुम जर्नलिस्ट बन गयी हो और डर डर के बोल रही हो। किसी जर्नलिस्ट को देखा है इस तरह बात करते हुए। तुम तो इतना बोलती थी कि मैं सुनते सुनते बेहरा हो जाता था आज तुम्हें सुनने के लिए कान तरस रहे है। तुम मुझसे भी इस तरह बात करोगी?
शिप्रा - सड़क पर खड़े होकर ही बात करते रहोगे चलो न अपने पुरानी जगह जहां हम हमेशा मिला करते थे।
समर - पहले तुम्हारे घर चलते है। मुझे आंटी जी से मिलना है।
शिप्रा - मैंने मम्मा को नहीं बताया कि तुम आये हो।
समर - मैं आया हूँ और तुमने मम्मा को बताया नहीं। मेरे बारे में तो सब बताया करती थी... आज समर ने ये किया, समर ने मुझे डांटा, समर मगरमच्छ की तरह लड़ता रहता है। समर ये, समर वो, सिर्फ समर, समर और समर ही तुम्हारी जुबां पर रहता था और आज मैं चार साल बाद वापस आया हूँ। तुमने मेरा किसी से जिक्र तक नहीं किया।


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