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तुमने कभी चांद नहीं देखा

शिप्रा समर को अपने घर ले जाती है। दोनों घर पहुँचते हैं। शिप्रा घर पहुँचते ही सीधा अपने कमरे में चली जाती है। समर शिप्रा के घरवालों से नज़रें चुराकर शिप्रा के कमरे की तरफ जा रहा होता है। लेकिन शिप्रा की मम्मी समर को रोकती है और उसका हालचाल लेती है।
समर बेटा कैसे हो? शिप्रा ने कहां कहां घुमाया तुम्हें?
समर - आंटी जी क्या आप जानती थी कि मैं आया हूँ?
शिप्रा की मम्मी - हां, शिप्रा ने बताया था कि तुम आ रहे हो। शिप्रा ने इस बार भी कुछ किया क्या ?
समर - { जी आंटी जी उसको जो करना था कर दिखाया } अरे नहीं नहीं आंटी जी शिप्रा तो बहुत ही सीधी साधी लड़की है भला वो ऐसे कैसे कर सकती है।

{ समर मन ही मन शिप्रा की हरकतों पर नाराज़ होता है }

शिप्रा के घर में समर की खातीरदारी के लिए सारा इतंजाम किया होता है लेकिन समर को शिप्रा का किया हुआ मजाक पसंद नहीं आता।

रात को खाना खाने के बाद दोनों छत पर यादों का खज़ाना खोलकर बैठ जाते है। थोड़ी देर बाद शिप्रा की मम्मी भी छत पर आ जाती है और वह भी वही पुराना किस्सा छेड़ देती हैं। जिसकी वजह से समर को जाना पड़ा था। समर को वापस आकर अच्छा लगा। समर मन ही मन सोच रहा था कि शिप्रा इतना सीरियस मजाक कैसे कर लेती है। शिप्रा की मम्मी के जाने के बाद समर ने शिप्रा से आखिरकार पूछ ही लिया कि तुम झूठ भी कितना प्यारा बोल लेती हो। तुमने तो मेरी हवा ही खराब कर दी थी।

शिप्रा का ध्यान समर की बातों पर नहीं होता वो तो चांद को एकटक देखे जा रही थी। समर शिप्रा से पूछता है तुमने कभी चांद नहीं देखा ?

शिप्रा - पता है ये चांद मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। जब भी कभी मन उदास होता है तो इस चांद से अपनी उदासी जाहिर करती हूँ। तुम वापस कब जा रहे हो?
समर - तुम मुझे अपने साथ दिवाली तो मना लेने दो। उससे पहले ही भगा दे रही हो। देखो तुम्हें गेंदे का फूल दूंगा लेकिन तुम्हारी ही खिड़की से तोड़कर। {हंसते हुए}

शिप्रा - देखो समर ये गेंदे के फूल की कहानी यहीं खत्म करो। वरना...
{इसके बाद समर शिप्रा के साथ दिवाली मनाने का आग्रह करता है शिप्रा मान जाती है।}


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