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दिल्ली दर्शन -2


दिल्ली की मशहूर जगह यानी सी.पी कनॉट प्लेस 

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तुम्हारे नंबर और शिकायते

contact list  ____________ ____________ मोबाइल में नये नंबरों की लिस्ट लम्बी होती जा रही है। कुछ contact unsaved ही पड़े हैे। कुछ करीबी दोस्त पीछे छुटते जा रहे है। रोज़ किसी दोस्त का कॉल आता है और किसी ना किसी काम में व्यस्त होने पर कहना पड़ता हैं आज शाम को याद से कॉल जरूर करूंगी। इसे वक़्त की कमी ही कहा जा सकता है। कुछ दोस्तों से समय समय पर मुलाकात होती रहती है लेकिन फिर भी कुछ दोस्त छूट जाते है। और जिन दोस्तो से मिलना नहीं होता उनकी शिकायतों की लिस्ट बढ़ती चली जाती है। कभी कॉलेज के दोस्त तो कभी स्कूल के दोस्त और हम आगे बढ़ते जाते हैं, सिर्फ उन किस्सों के साथ जिन्हें हम अब याद करके धीमे से मुस्कुरा देते है। कोमल कश्यप

दिल्ली में समर की वापसी पार्ट - 2

समर - कहा हो? तुम तो हमेशा टाइम से पंहुचती हो। आज इतना लेट... शिप्रा - अरे बस लेट हो गयी। समर - लेकिन बता तो देती तुम्हें कॉल कर रहा हूं। तुम कॉल रिसीव क्यूं नहीं कर रहीं? शिप्रा - मोबाइल साइलेंट पर था। समर - तुम इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हो। शिप्रा - मगरमच्छ वाली हरकतें गयी नहीं तुम्हारी ... बस पहुँच रही हूँ। (शिप्रा समर से मिलने पहुँच जाती है) समर - आगयी मैडम... शिप्रा - मगरमच्छ 😑 पहले ये बताओ भूले भटके सदर इतने भीड़ भाड़ वाले शहर में कैसे आना हुआ। तुम इतने साल कहा थे? दीवाली की शॉपिंग करने आये हो? समर - तुमने जब मुझे ना कहा था फिर मेरे पास इस सिटी को छोड़कर जाने के अलावा कोई ऑपशन नहीं था। क्या रक्खा है इस शहर में तुम्हारे अलावा 😌 शॉपिंग तो करूंगा तुम्हारे साथ। शिप्रा - फोर इयर्स यार तुम अभी तक वहीं हो... इन चार सालों में बहुत कुछ बदला है। समर - मुंबई में दिल्ली को बसाकर रक्खा है। यानी तुम्हें... तुमने उस दिन जो किया भुला दिया। तुम्हारे बाद मेरा जिगरी दोस्त तुम्हारा भाई जॉय ने भी बात करना छोड़ दिया था। मैं अकेला हो गया था। इस ब्यूटीफुल सिटी में मेरा हार्ट अभी भी धड़कता है। 😘 शिप्रा...

समर पार्ट - 1

जनवरी,2016 एक सुबह समर - क्यों नाराज़ होती हो ? शिप्रा - नाराज़ कहा हूं बस ऐसे ही | तुम पर तो इंग्लिश का भूत सवार हो गया है, क्यों सुनते हो किसी की बात (गुस्साएं हुए)................अरे हां मैंने तुम्हारी वो कविता पढ़ी थी जो तुमने मुझे कल भेजी थी| क्या गज़ब लिखते हो| तुम ऐसा करो एक्टिंग छोड़ो और कवि बन जाओ। समर - कविता बस शौक के लिए लिखता हूं बाकि तुम जानती ही हों सब | तुम जानती हो हिंदी से मुझेे बहुत प्रेम है इसलिए अंग्रेज़ी बोलने से परहेज़ करता हूं और लोग समझ लेते है कि मुझे अंग्रेज़ी आती ही नहीं| एक्टिंग मेरी जिन्दगी है। शिप्रा - अरे भोले भाले लड़के अपने मन की सुनते है और लोग क्या कहते है उसकी चिंता मत किया करो तुम सिर्फ अपनी एक्टिंग पर ध्यान दो | समर - रिमा लोग सहीं कहते है मुझे अपने स्वभाव में थोड़ा बदलाव कर ही लेना चाहिए तुम बताओ अंग्रेजी में ही बात करनी शुरू कर दूं?? शिप्रा - तुम्हें अपनी मर्ज़ी से खुलकर जीना चाहिए...... एक्टिंग स्कूल ऑफ ड्रामा से निकलने के बाद क्या करने वाले हो?? समर - मैथिली तुम्हें रास नहीं आती और मुझे मैथिली में ही करनी है| सोच ...